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Archive for May, 2009

माँ

जग में जब ली पहली साँस
माँ तब तुम थी मेरे पास
कदम बढाया पहला जब भी
मेरे पास माँ था तुम्हारा ही हाथ
आँखों को नम मैंने जब जब पाया
आंसू पोछने आपका आँचल पाया
अपने जीवन में जब भी कठिनाई आई
मेरी मदद को माँ तब तब तुम आई
अपने आप को जब भी जख्मी पाया
माँ मैंने आपके हाथ में मरहम [...]

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कहते है खामोशी की होती नहीं जुबान
पर यादो के शहर की है ये बाघबान
हँसते खिलखिलाते लम्हों की सुनाती दास्तान
और आखो के आसुओं की देती येः बयान
कल आज और कल ये सब में है विध्यमान
ये ना सुने किसी की और ना दे किसी पर ध्यान
संकट के लम्हों में, अनचाहे प्रश्नों में,सब जगह विराजमान
अगर भावः प्रकट ना [...]

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