
कहते है खामोशी की होती नहीं जुबान
पर यादो के शहर की है ये बाघबान
हँसते खिलखिलाते लम्हों की सुनाती दास्तान
और आखो के आसुओं की देती येः बयान
कल आज और कल ये सब में है विध्यमान
ये ना सुने किसी की और ना दे किसी पर ध्यान
संकट के लम्हों में, अनचाहे प्रश्नों में,सब जगह विराजमान
अगर भावः प्रकट ना कर पाओ, तो ये है आपका मुकाम
कभी मातम के साथ, कभी चकित भावः में आती है
आपको सूनेपन का एहसास कराती है वो
कभी सुकून, कभी जूनून या जवाब दे जाती है वो
पर हाँ एक सच्चे दोस्त का फर्ज निभाती है वो
इतना कुछ करती है फिर भी शांत रह जाती है वो
आपके संग हो कर भी अपने अस्तित्व को छुपा लेती है वो
आप उससे भूल भी जाओ एक पल के लिए
पर हर पल आपसे कुछ कह जाती है वो…
बस यही मान लो बिना कुछ कहे बहुत कुछ कह जाती है वो
फिर भी बिना जुबान हर पल गुनगुनाती है वो..
आपके साथ है वो बस इतना हे याद दिलाती है वो
मेरे लफ्जो के जरिये आप तक आना चाहती है वो…
khamoshi se kafi kuch sikh gaye ho baba