This one is special to me as this one was made in train, when our group was leaving for home and we knew we will never meet again in college and never be together. A sentimental moment it was and its still afresh in my heart, guys and gals from nit trichy please take it as tribute to batch of 2007 and more special to Dude of MP, i would be glad if some one in comments can mention all the names that our juniors gave to us on the farewell t-shirt. I am missing you guys..please read it!! 
छुटा अपना यह कारवां
पीछे रह गया यादो का बस समां
आगे है नई मंजिले
एक अंजना सा समां
छुटा अपना यह कारवां …
ना आयेंगे वो बीते दिन
सुनी बहुत होगी जिंदगी उन के बिन
दोस्तों से होकर यू जुदा
कैसे बिताएंगे अब हर दिन
छुटा अपना यह कारवां …
अपनों से दूर अपना सा एक जहाँ
ख़ुशी और गम में झूमता कारवां
होती थी मस्ती की हर वो रात
ख्वाबो में झूमता था दिन का समां
छुटा अपना यह कारवां …
फूलो में खेलती थी वह जिंदगी
और कांटो को भी झेलती वो जिंदगी
वैसे होती थी कमरे में हर चीज यहाँ वहाँ
मोबाइल पर लोग लगे रहते थे जाने कहाँ
छुटा अपना यह कारवां …
दारु सुट्टे में बिताये गए वो दिन
बन गए है बस यादो के पल छीन
देते रहे हम जिस जगह को गालिया
आज याद आती है उसकी हर गलिया
छुटा अपना यह कारवां …
वो मेस के खाने को कोसना
और हर पल घर जाने की सोचना
वो घर के खाने पर दानव की तरह टूटना
और फिर झगडे में आपनो का यू रूठना
छुटा अपना यह कारवां …
वो टीवी पर देखना हर भजन
और अपने गेट का पौष्टिक भोजन
wild west संगम की वो रातें
और छत पर बिताये हर वो रातें
छुटा अपना यह कारवां …
first year से final year का ये सफ़र
अब है हमारी यादो का एक मंजर
दुआ है मेरी, मिलते रहना मेरे यारो
बाटते रहना खुशिया मेरे प्यारो
जिंदगी के अगले सफ़र में
पाना ऊँची ऊँची कई मंजिले
दूर हो कर भी हमसे मेरे यारो
दिल में याद रखना इन दिनों को यारो
बस अब छुटा अपना यह कारवां …



