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Archive for January 6th, 2019

Happy new year all, hope you all had a good new year. I apologies I should have published the next episode of Cha and Chi. But here I am with something totally different and something in my own language. Its very rare that people come across individual who share a story that you could correlate, Something that you know you have gone through and faced even though  you haven’t. I had a chance to interact with one such personality, even though my story is no match to their’s but what it has done is, plucked some old chords which were long broken. Chords which you buried long time back and termed them “Dead”, when such chords play again you need words and nothing can match those tunes then your own mother tongue. Not a jolly one to start with but its an outcome of some dead strings reattached.

 

आज फिर दिल खुद से आजाद हुआ है
खुद से फिर बेपनाह हुआ है
जिसकी आवाज से जागते थे हम
और जिसको देख कर सोते थे हम
आज उसके ख़याल में दिल खुद से फ़ना है

कर दिया अपने दिल को अपने हाथो से तबाह
फिर भी एक उम्मीद की डोर को अब भी थामे है
ना गिला है खुद से ना शिकवा है किसी से
फिर भी क्यों खुद से अब भी लापता है

आज उसके ख्याल में दिल खुद से फ़ना है…

सपनो की जगदोजहद को उजाड़ दिया है
अरमानो की कश्ती को भी डूबा दिया है
कहने को तो आज भी हम ज़िंदा ही है
पर अपनी ही मौत पर हम आज भी शर्मिंदा है

आज उसके ख्याल में दिल खुद है फ़ना है…

आज की राख पे कल का सफर बुनते है
और हर बीते लम्हो को आज भी दिल में जीते है
करे लाख कोशिश पर खुद के गुनहगार है
रात तो कट नहीं रही पर सुबह का इंतजार है

आज उसके ख़याल में दिल खुद से फ़ना है…

अपनी मर्जी की कश्ती धार में गुमनाम है
लौ तो बुझ गयी अब ना कोई एहसास ज़िंदा है
कर तो ले हम हालात से अभी कोई समझौता
पर कहने को बूतऔर नाम के लिए ही ज़िंदा है

आज उसके ख़याल में दिल खुद से फ़ना है…

I am sure not everyone could understand the words, but for those of you who couldn’t understand a word, enjoy this music

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